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दिल्ली टीचर भर्ती TGT PGT PRT टीचर बनने के राह अब होती जा रही है मुश्किल, जाने क्यों ?

दिल्ली टीचर भर्ती TGT PGT PRT टीचर बनने के राह अब होती जा रही है मुश्किल, जाने क्यों ? दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से मै आपको निराश नहीं करना चाहता, लेकिन फ़र्ज़ कहता है, आपसे कुछ न छुपाऊं ! इसलिए कोशिश की है, के आप सभी को वो सब बताऊँ, जो शायद हम देख कर भी अनदेखा कर रहे हैं !

दिल्ली टीचर भर्ती – राह अब होती जा रही है, मुश्किल

टीचर क्यों बनें ?

“बहुत-से लोग टीचर बनना इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इस पेशे से वे दूसरों की मदद कर सकते हैं। (Teaching) बच्चों की ज़िंदगी को सँवारने का वादा है।”—टीचर, स्कूल और समाज!

कितना मुश्किल है टीचर बनना ?

हालाँकि कुछ टीचरों को देखने से लगता है कि पढ़ाना बहुत आसान काम है, मगर हकीकत यह है कि पढ़ाने का काम ऐसी मैराथन दौड़ की तरह है, जिसमें बहुत-सी अड़चनें पार करनी होती हैं। जैसे, क्लास में हद-से-ज़्यादा बच्चे, कागज़ों पर ढेर सारा काम, स्कूल के मैनेजमेंट का दबाव, बात न माननेवाले विद्यार्थी और कम तनख्वाह।

दिल्ली टीचर भर्ती

टीचर की जुबानी

स्पेन के मेड्रिड शहर के एक टीचर, पैद्रो ने यह कहा: “ टीचर का काम हरगिज़ आसान नहीं है। इसमें बहुत-से त्याग करने पड़ते हैं। इतनी मुश्किलों के बावजूद, मैं यही कहूँगा कि पढ़ाना व्यापार की दुनिया में नौकरी करने से कहीं बेहतर है।” लेकिन देशों के बड़े शहरों के स्कूलों में पढ़ाना और भी मुश्किल हो सकता है।

बच्चों का विरोधी स्वभाव

ड्रग्स, अपराध, अनैतिकता और कभी-कभी माता-पिता का अपने बच्चों पर ध्यान न देने की वजह से स्कूल का माहौल बुरी तरह बिगड़ जाता है और अनुशासन नाम की चीज़ ही नहीं रहती। बच्चों का टीचरों का विरोध करना आम बात है। ऐसा होने पर भी बहुत-से पढ़े-लिखे लोग टीचर बनना क्यों पसंद करते हैं ?

अनीता वर्मा और साक्षी बत्रा Delhi शहर में टीचर हैं। वे किंडरगार्टन से लेकर दस साल तक के बच्चों को पढ़ाती हैं। उनसे हमने पूछा . . .!

कोई टीचर बनने का फैसला क्यों करता है?

अनीता वर्मा : “मैं टीचर क्यों बनी ? बच्चों के लिए प्यार की वजह से। मैं जानती हूँ कि कुछ बच्चों की मदद करनेवाली सिर्फ मैं हूँ।”

साक्षी बत्रा : कहती है, “मेरा आठ साल का भतीजा, स्कूल में ठीक से पढ़ाई नहीं करता था। खासकर, उसे ठीक से पढ़ना नहीं आता था। इसलिए मैं उसे घर पर पढ़ाती थी। फिर जब वह और दूसरे बच्चे अच्छी तरह पढ़ाई करने लगे तो उन्हें देखकर मुझे बड़ा संतोष मिला ! इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं टीचर बनूँगी और मैंने बैंक की नौकरी छोड़ दी।”

आपको इस बात की हैरानी होगी के CTET सीबीएसई- दिल्ली टीचर भर्ती की टीम ने कई देशों में टीचरों से यही सवाल पूछा और उनके कुछ जवाब नीचे दिए गए हैं।

इटली में रहनेवाला जूलियानो 

जिसकी उम्र 40 से ऊपर है, कहता है: “मैंने यह पेशा इसलिए चुना क्योंकि जब मैं विद्यार्थी था, तभी मेरे अंदर इस काम के लिए चाहत पैदा हुई।

मैं सोचता था कि इस काम में मुझे हमेशा कुछ नया करने और दूसरों में प्रेरणा जगाने के बहुत-से मौके मिलेंगे। इस पेशे में कदम रखते वक्‍त मेरे अंदर जो जोश था, उसी की बदौलत मैं शुरू में आयी कठिनाइयों को पार कर सका।”

न्यू साऊथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया के निक ने कहा

“मैंने रासायनिक शोधकार्य की पढ़ाई की थी मगर इस क्षेत्र में नौकरी पाने की गुंजाइश बहुत कम थी, जबकि शिक्षा के क्षेत्र में ढेरों मौके मिल रहे थे। जब मैंने पढ़ाना शुरू किया तो मुझे इससे आनंद मिला और लगता है, जिन विद्यार्थियों को मैं पढ़ाता हूँ !

उन्हें भी मेरा पढ़ाने का तरीका पसंद है।” पढ़ाने का कैरियर चुनने के पीछे अकसर माता-पिता के उदाहरण का बहुत बड़ा हाथ रहा है।

केन्या के विलियम ने हमारे सवाल का यह जवाब दिया

“मेरे अंदर पढ़ाने की जो इच्छा पैदा हुई उसकी सबसे बड़ी वजह मेरे पिता हैं। वे 1952 में टीचर थे। यह जानकर कि मैं जवानों की सोच को एक साँचे में ढाल रहा हूँ, मुझे इस पेशे में लगे रहने की और भी प्रेरणा मिली।”

रोज़मेरी भी कॆन्या की है, उसने हमें बताया

“हमेशा से मेरा अरमान था कि मैं ऐसे लोगों की मदद करूँ जो गरीब और मोहताज हैं। इसलिए मुझे नर्स या टीचर, दोनों में से कोई एक पेशा चुनना था। मुझे टीचर बनने का मौका पहले मिला। माँ होने की वजह से, इस पेशे से मेरा लगाव और भी बढ़ा है।”

जर्मनी के ड्यूरेन शहर के बर्टोल्ड ने कहा

टीचर बनने के पीछे उसकी कुछ और वजह थी, “मेरी पत्नी ने मुझे कायल किया कि मेरे अंदर एक अच्छा टीचर बनने की काबिलीयत है।” और उसकी बात सही निकली। उसने आगे कहा, “आज मुझे इस पेशे से बेहद खुशी मिलती है।

जब तक एक टीचर, शिक्षा का महत्त्व नहीं समझता और बच्चों में दिलचस्पी नहीं लेता, उसके लिए एक अच्छा, कामयाब टीचर बनना, इस पेशे में टिके रहना और इससे संतोष पाना मुमकिन नहीं है।”

जापान के नाकात्सू शहर के एक टीचर, मासाहिरो ने कहा

“माध्यमिक स्कूल के पहले साल में मेरा टीचर सचमुच लाजवाब था। उन्हें देखकर ही मुझे टीचर बनने की प्रेरणा मिली। वे हमें सच्ची लगन के साथ सिखाते थे। और इस पेशे में टिके रहने की मेरी सबसे खास वजह यह है कि मैं बच्चों से बेहद प्यार करता हूँ।”

चौवन साल का योशिया ने कहा

उसकी पहले एक फैक्ट्री में बढ़िया वेतनवाली नौकरी थी। उसे वहाँ काम करना और उस नौकरी के लिए आना-जाना, गुलामी करने जैसा लगा। “एक दिन मैंने सोचा, ‘कब तक मैं इस तरह जीता रहूँगा ?

मैंने ऐसी नौकरी की तलाश करने का फैसला किया जो चीज़ों से नहीं बल्कि इंसानों से ताल्लुक रखती हो। पढ़ाने का काम बेमिसाल है। इस काम में बच्चों के साथ घुलने-मिलने का मौका मिलता है। इसमें हम दूसरों के साथ प्यार और हमदर्दी से पेश आते हैं।”

रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर की वालेनटीना

टीचर बनने के इस पहलू की कदर करती है। वह कहती है: “पढ़ाना मेरी पसंद का पेशा है। मैं 37 सालों से प्राथमिक-स्कूल की टीचर हूँ। मुझे बच्चों को पढ़ाने में बहुत खुशी मिलती है, खासकर छोटे बच्चों को। मुझे अपना काम बेहद पसंद है इसलिए मैं अब तक रिटायर नहीं हुई हूँ।”

विलियम एयर्स, जो खुद एक टीचर हैं, लिखते हैं

“लोगों को पढ़ाना इसलिए पसंद है क्योंकि वे बच्चों और जवानों से प्यार करते हैं या वे उनके साथ होना चाहते हैं। वे उनको खुलते, बढ़ते हुए, ज़्यादा काबिल और हुनरमंद और तेजस्वी होते देख बहुत खुश होते हैं . . . लोग सिखाने का काम इसलिए करते हैं . . . क्योंकि इस काम में वे खुद को दूसरों की खातिर दे सकते हैं। मैं दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की उम्मीद से सिखाता हूँ।”

जी हाँ, बहुत-सी परेशानियों और मुसीबतों के बावजूद, हज़ारों समर्पित स्त्री-पुरुष पढ़ाने के इस पेशे को चुनना पसंद करते हैं। उनके सामने आनेवाली कुछ बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं? अगले लेख में इस सवाल का जवाब दिया जाएगा।

टीचर और माता-पिता के बीच बातचीत के लिए कुछ सुझाव – दिल्ली टीचर भर्ती

✔ माता-पिताओं से पहचान बढ़ाइए। ऐसा करना समय की बरबादी नहीं है। इससे उन्हें और आपको भी फायदा होगा। यह आपके लिए अच्छा मौका है कि आप उनके साथ संपर्क बनाए रखें, क्योंकि वे आपकी बहुत मदद कर सकते हैं।

✔ माता-पिता से बात करते वक्‍त उन्हें इज़्ज़त दीजिए और यह एहसास मत दिलाइए कि वे आपसे कम जानते हैं। उनसे टीचरों की भाषा मत बोलिए।

✔ जब आप बच्चों के बारे में बात करते हैं तो उनकी खूबियों के बारे में ज़्यादा बात कीजिए। डाँटने-फटकारने से ज़्यादा शाबाशी देने में फायदा है। माता-पिताओं को बताइए कि बच्चों की कामयाबी के लिए वे किस तरह मदद दे सकते हैं।

✔ माता-पिताओं को बात करने दीजिए और ध्यान से उनकी सुनिए।

✔ बच्चे के घर के माहौल को समझने की कोशिश कीजिए। अगर संभव है, तो उसके घर जाइए।

✔ अगली बातचीत के लिए तारीख तय कीजिए। बातचीत जारी रखना बेहद ज़रूरी है। इससे पता चलेगा कि आपको बच्चे में सचमुच दिलचस्पी है। दिल्ली टीचर भर्ती

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