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कुपोषण (Malnutrition) से हर साल मरते हैं 21 लाख नौनिहाल Fact Revealed

कुपोषण (Malnutrition) से हर साल मरते हैं 21 लाख नौनिहाल Fact Revealed – विश्व बैंक के मुताबिक भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शुमार हैं, जिनमें बच्चों में कुपोषण चरम पर है। बच्चों का कम वजन होना भारत में सबसे ज्यादा है। संयुक्त राष्ट के मुताबिक हर साल करीब 21 लाख बच्चे पांच साल की उम्र में पहुंचने से पहले ही मर जाते हैं। हर मिनट चार बच्चों की मौत हो रही है।

कुपोषण

अधिकतर की मौत ठीक होने वाले रोगों के कारण होती है। इनमें डायरिया, टायफायड, मलेरिया, निमोनिया आदि हैं। अकेले डायरिया के कारण एक हजार बच्चे रोज मरते हैं। भूखे लोगों की संख्या में भी भारत दुनिया के उन देशों में शुमार हैं, जिनका नाम फेहरिस्त में सबसे ऊपर है।

कुपोषण दो प्रकार का होता है

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप निगम ने बताया कि अंडर न्यूट्रिशन यानी कमवजनी होना और ओवर न्यूट्रिशन यानी ओवरवेट या ज्यादा वजन का होना। सामान्य तौर पर जिन्हें  पर्याप्त भोजन नहीं मिलता वो अंडर न्यूट्रिशन कहलाते हैं। और जिनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति अच्छी होती है, ऐसे बच्चे अधिक पौष्टिक भोजन खाने के चलते ओवर न्यूट्रिशन के शिकार हो जाते हैं।
कुपोषण के कारण शरीर में विभिन्न विटामिन, मिनरल, लोह तत्व की कमी हो जाती है। इसके कारण कई तरह के रोग बच्चों को ग्रस्त कर लेते हैं।  देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कुपोषण के शिकार बच्चे पाए जाते हैं।
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कुपोषण के लक्षण 

– कम वजन
– धीमी ग्रोथ
– व्यवहार में बदलाव
– एडीमा यानी शरीर के अंगों में सूजन
– त्वचा में बदलाव

कुपोषण के कारण 

गरीबी, स्वास्थ्य शिक्षा का अभाव, पौष्टिक भोजन न मिलना, बच्चों को मां का दूध ना पिलाना, साफ-सफाई का ध्यान ना रखना, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, दूषित पेयजल का प्रयोग करना।

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